बेरोजगार युवाओं के लिए बड़ी खबर: ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ से साकार होंगे युवाओं के सपने; 11 हजार छात्रों को मिलेगी निःशुल्क कोचिंग
- 11 करोड़ के बजट के साथ योजना का शासनादेश जारी, स्क्रीनिंग परीक्षा से होगा चयन।
- सिविल सेवा, बैंकिंग, एसएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी होगी आसान।
देहरादून, 20 अप्रैल 2026। उत्तराखंड सरकार राज्य के मेधावी युवाओं के करियर को नई उड़ान देने के लिए ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का आगाज़ करने जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष 11,000 छात्र-छात्राओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग प्रदान की जाएगी। इस योजना के सुचारू संचालन के लिए शासन द्वारा शासनादेश जारी कर दिया गया है, जिस पर राज्य सरकार सालाना लगभग 11 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
सरकार का लक्ष्य और चयन प्रक्रिया
योजना का लाभ पूर्णतः पारदर्शी तरीके से पहुँचाने के लिए जनपद स्तर पर खुली स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित की जाएगी। योजना के तहत विभिन्न क्षेत्रों के लिए सीटों का निर्धारण इस प्रकार है:

पात्रता एवं डिजिटल सुविधाएँ
योजना का लाभ स्नातक/स्नातकोत्तर के अंतिम वर्ष में पढ़ रहे छात्रों के साथ-साथ उन युवाओं को भी मिलेगा जिन्होंने एक वर्ष पूर्व अपनी डिग्री पूरी कर ली है। चयनित अभ्यर्थियों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रत्येक छात्र को एक व्यक्तिगत यूजर आईडी और पासवर्ड दिया जाएगा, जिसके माध्यम से वे डिजिटल लाइब्रेरी, वीडियो लेक्चर, प्रैक्टिस सेट और साप्ताहिक मॉक टेस्ट का लाभ उठा सकेंगे। पिछड़ रहे छात्रों के लिए विशेष ‘रेमेडियल क्लासेस’ (सुधारात्मक कक्षाएं) भी आयोजित की जाएंगी।
प्रभावी निगरानी तंत्र
- योजना की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए दो उच्च-स्तरीय समितियां बनाई गई हैं:
- कार्यकारिणी समिति: सचिव (उच्च शिक्षा) की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम दैनिक संचालन देखेगी।
- स्टेयरिंग समिति: मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय टीम वार्षिक समीक्षा और मूल्यांकन करेगी।
“हमारा संकल्प है कि संसाधनों का अभाव किसी भी प्रतिभाशाली युवा की राह का रोड़ा न बने। ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ के माध्यम से हम न केवल युवाओं को परीक्षाओं के लिए तैयार कर रहे हैं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की शक्ति भी दे रहे हैं।” — डॉ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।

