एक जागरूक नागरिक की पहल लाई रंग: CM हेल्पलाइन की शिकायत पर उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में बड़ा प्रशासनिक सुधार
देहरादून, शुक्रवार, 05 जून 2026। उत्तराखंड में जन शिकायत तंत्र की ताकत का एक बेहतरीन उदाहरण देखने को मिला है। नैनीताल जिले के भीमताल निवासी आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता और सामाजिक सरोकारों से जुड़े चंद्र शेखर जोशी की एक शिकायत ने स्वास्थ्य विभाग की पूरी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव ला दिया है। इसके बाद अब पूरे सूबे के स्वास्थ्य महकमे में कर्मचारियों के सेवा संबंधी मामलों में पारदर्शिता लाने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
क्या थी पूरी समस्या?
अपनी शिकायत में चंद्र शेखर जोशी ने मुद्दा उठाया था कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी अपने वेतन, छुट्टियों, ट्रांसफर और अन्य सेवा संबंधी दिक्कतों को लेकर अपने अधिकारियों को आवेदन तो देते हैं, लेकिन उन आवेदनों पर क्या एक्शन लिया गया, इसकी जानकारी खुद कर्मचारियों को ही नहीं मिल पाती। इस वजह से कर्मचारी अपने ही मामलों की स्थिति जानने के लिए भटकते रहते हैं।
महानिदेशक कार्यालय ने लिया कड़ा संज्ञान
इस शिकायत की गंभीरता को देखते हुए महानिदेशक (चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) कार्यालय ने पूरे मामले की जांच कराई। इसके बाद 2 मई 2026 को महानिदेशक स्वास्थ्य की अगुवाई में हुई एक हाई-लेवल कमेटी की बैठक में इस पर बारीकी से मंथन किया गया।
अब हर कर्मचारी को मिलेगी कार्यवाही की कॉपी
कमेटी ने साफ माना कि जिन मामलों में गोपनीयता की जरूरत नहीं है, वहाँ कर्मचारियों के आवेदनों पर की गई कार्यवाही की एक कॉपी संबंधित कर्मचारी को जरूर दी जानी चाहिए। इसी फैसले के आधार पर महानिदेशक कार्यालय ने राज्य के सभी:
- मुख्य चिकित्साधिकारियों (CMOs)
- प्रमुख चिकित्सा अधीक्षकों
- और नियंत्रण अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।
- बदलाव का असर: अब कर्मचारियों को उनके आवेदनों पर हुए निर्णय या कार्यवाही की प्रति अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएगी।
सुशासन और पारदर्शिता की ओर कदम
विभाग को भरोसा है कि इस नई व्यवस्था से न केवल प्रशासनिक काम-काज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि कर्मचारियों को भी समय पर अपने मामलों का अपडेट मिलेगा। इसके साथ ही बेवजह के आरटीआई (RTI) आवेदनों और शिकायतों के बोझ में भी कमी आएगी।
प्रशासनिक जानकारों के मुताबिक, भीमताल के चंद्र शेखर जोशी की इस मुहिम ने साबित कर दिया है कि अगर देश का नागरिक जागरूक हो और सरकारी तंत्र का सही इस्तेमाल करे, तो व्यवस्था में बहुत बड़ा और सकारात्मक सुधार लाया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग का यह कदम सुशासन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

