उत्तराखंड मूल की बेंगलुरु की साहित्यकार दीपाली पंत तिवारी ‘दिशा’ ‘नागरी सेवी सम्मान–2026’ से विभूषित
बेंगलुरु, कर्नाटक। सिलिकॉन सिटी बेंगलुरु की वरिष्ठ शिक्षाविद, प्रख्यात कवयित्री और साहित्यकार दीपाली पंत तिवारी ‘दिशा’ के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। हिंदी भाषा और देवनागरी लिपि के उत्थान व प्रसार में उनके अतुलनीय योगदान को रेखांकित करते हुए उन्हें इस वर्ष के प्रतिष्ठित ‘नागरी सेवी सम्मान–2026’ से नवाजा गया है।

यह गरिमामयी अलंकरण 21 जून 2026 को बेंगलुरु की जैन यूनिवर्सिटी में आयोजित 50वें नागरी लिपि राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान प्रदान किया गया। इस भव्य राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन नागरी लिपि परिषद (नई दिल्ली) और बेंगलुरु हिंदी अकादमी के संयुक्त प्रयास से किया गया था, जिसमें देश के कोने-कोने से जुटे प्रख्यात भाषाविदों, विद्वानों और साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
समर्पण और साधना का मिला फल
समारोह के मुख्य मंच पर श्रीमती दीपाली पंत तिवारी को सम्मान-स्वरूप प्रशस्ति-पत्र और स्मृति-चिह्न भेंट किया गया। यह सम्मान उनके साहित्य के प्रति अटूट समर्पण, निरंतर सृजनशीलता और गैर-हिंदी भाषी क्षेत्र में राजभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए दिया गया है।
“यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि मेरे विद्यार्थियों, परिवार और उन तमाम हिंदी प्रेमियों के अटूट विश्वास का परिणाम है। यह गौरव मुझे देवनागरी और हिंदी की सेवा के पथ पर और अधिक निष्ठा से आगे बढ़ने की ऊर्जा देगा।” — दीपाली पंत तिवारी ‘दिशा’
बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी

दीपाली पंत तिवारी वर्तमान में एन.पी.एस. ओ.एम.आर. (NPS OMR), बेंगलुरु में हिंदी विभागाध्यक्ष के पद पर अपनी सेवाएँ दे रही हैं। अध्यापन के क्षेत्र में नई पीढ़ी को भाषा से जोड़ने के साथ-साथ वे एक कुशल लेखिका, कवयित्री, संपादक और ओजस्वी मंच संचालिका के रूप में भी साहित्यिक जगत में बेहद सक्रिय और लोकप्रिय हैं।
शैक्षणिक और साहित्यिक जगत में खुशी की लहर
इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के बाद बेंगलुरु के शिक्षा और साहित्य जगत में जश्न का माहौल है। विभिन्न शिक्षण संस्थाओं, कवियों और सामाजिक संगठनों ने दीपाली पंत तिवारी ‘दिशा’ को इस सफलता पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

