उत्तराखंड के शिक्षा रत्न डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल को मिला भारत सरकार का ‘डिजिटल कर्मयोगी’ सम्मान, युवाओं के लिए बने रोल मॉडल

देहरादून / हरिद्वार / ऋषिकेश। कर्तव्य पथ पर निरंतर आगे बढ़ने की मिसाल पेश करते हुए शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। उन्हें भारत सरकार के प्रतिष्ठित ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत डिजिटल कर्मयोगी सर्टिफिकेट से नवाजा गया है। डॉ. घिल्डियाल की यह सफलता आज के युवाओं के लिए निरंतर आगे बढ़ने और सीखते रहने की एक बड़ी प्रेरणा बन गई है।

कठिन परीक्षा पास कर हासिल किया मुकाम

वैसे तो हर व्यक्ति अपने-अपने स्तर पर जिम्मेदारियों का निर्वहन करता है, लेकिन कुछ लोग समाज के सामने एक नई नजीर पेश करते हैं। शिक्षा विभाग में प्रशासनिक दायित्व संभाल रहे डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने ऐसा ही कर दिखाया है। उन्होंने ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन’ द्वारा संचालित बेहद जटिल और बहुआयामी डिजिटल कोर्सेज की परीक्षा को सफलतापूर्वक पास कर ‘भारत कर्मयोगी’ का गौरव हासिल किया है। उनकी इस विशेष उपलब्धि पर प्रबुद्धजनों और सहयोगियों ने खुशी जताते हुए उन्हें बधाई दी है।

विज्ञान, संस्कृति और ज्योतिष का अनूठा संगम

डॉ. घिल्डियाल का सफर छात्र जीवन से ही उपलब्धियों से भरा रहा है:

  • गोल्ड मेडलिस्ट: उन्होंने विज्ञान (Science) और वेदांत (Vedanta) जैसे दो विपरीत ध्रुवों वाले विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त की और दोनों में ही स्वर्ण पदक (Gold Medals) हासिल किए।
  • गवर्नर अवार्ड: वर्ष 2006 में लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित होने के बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं दीं, जिसके लिए उन्हें वर्ष 2015 में राज्य के ‘प्रथम गवर्नर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया था।
  • सामाजिक सरोकार: प्रशासनिक कामकाज के साथ-साथ डॉ. घिल्डियाल एस्ट्रो साइंसेज (ज्योतिष विज्ञान) में भी गहरी पकड़ रखते हैं। वे सौरमंडल की खगोलीय घटनाओं पर पैनी नजर रखकर समाज से अंधविश्वास को दूर करने और लोगों का सही मार्गदर्शन करने में जुटे हुए हैं।

विज्ञान की तार्किकता और सनातन ज्ञान के अनूठे संगम डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने यह साबित कर दिया है कि सीखने और देश सेवा करने की कोई उम्र या सीमा नहीं होती। युवाओं के लिए उनका यह ‘कर्मयोगी’ रूप वाकई अनुकरणीय है।