उत्तराखंड में सहकारिता को रफ्तार: रानीखेत और हल्दूचौड़ की बंद पड़ी दवा फैक्ट्रियां होंगी पुनर्जीवित, 200 युवाओं को मिलेगा सीधा रोजगार

देहरादून। उत्तराखंड में सहकारिता के जरिए औद्योगिक विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) ने राज्य में लंबे समय से बंद पड़ी दो प्रमुख औद्योगिक इकाइयों – रानीखेत स्थित को-ऑपरेटिव ड्रग फैक्ट्री (CDF) और हल्दूचौड़ स्थित उत्तराखंड स्टेट मेडिसिन एंड पैरामेडिकल्स लिमिटेड (UMPL) को दोबारा शुरू करने का फैसला किया है। इन दोनों फैक्ट्रियों में आधुनिक मशीनें और हाई-टेक लैब स्थापित कर बड़े पैमाने पर आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन शुरू किया जाएगा।

सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को मजबूत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलना चाहती है। यूसीएफ ने इन दोनों बंद इकाइयों के कायाकल्प के लिए एक बेहतरीन रोडमैप तैयार कर लिया है।

🌿 पारंपरिक और आधुनिक आयुर्वेद का संगम

इन दोनों अत्याधुनिक फैक्ट्रियों में उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ विभिन्न प्रकार की पारंपरिक आयुर्वेदिक दवाइयां बनाई जाएंगी:

  • वटी और चूर्ण: महाशंख वटी, आरोग्यवर्धिनी वटी, त्रिफला चूर्ण और अश्वगंधा चूर्ण।
  • आसव और तेल: अर्जुनारिष्ट, दशमूलारिष्ट और महानारायण तैल।
  • अन्य उत्पाद: रस, भस्म (जैसे अभ्रक भस्म), गुग्गुल और पाक-अवलेह का भी निर्माण होगा।
💼 रोजगार और किसानों को फायदा

फैक्ट्रियों के दोबारा शुरू होने से न केवल औद्योगिक विकास होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए साधन भी खुलेंगे:

  • प्रत्यक्ष रोजगार: रानीखेत और हल्दूचौड़ के 200 से अधिक युवाओं को सीधे तौर पर इन इकाइयों में नौकरियां मिलेंगी।
  • किसानों को लाभ: जड़ी-बूटी और सुगंधित पौधों की खेती करने वाले 500 से 1,000 स्थानीय किसान सीधे इन फैक्ट्रियों से जुड़ेंगे, जिससे उन्हें अपनी उपज का सही दाम मिलेगा।
  • अप्रत्यक्ष रोजगार: पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के जरिए हजारों अन्य लोगों को काम मिलेगा।
📈 100 करोड़ रुपये के टर्नओवर का लक्ष्य

सालाना टर्नओवर और मुनाफा: सहकारिता मंत्री के अनुसार, जब ये दोनों इकाइयां अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करना शुरू कर देंगी, तो सालाना 100 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य रखा गया है। इससे सरकार को हर साल 10 से 15 करोड़ रुपये का मुनाफा होने की उम्मीद है।

यह पहल उत्तराखंड को आयुर्वेदिक दवाओं के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाएगी और जड़ी-बूटी उत्पादन से लेकर ग्रामीण विकास तक, सहकारिता का एक बेहतरीन मॉडल साबित होगी।