रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: शिरडी में नए निजी रक्षा विनिर्माण परिसर का शुभारंभ, ‘सूर्यस्त्र’ रॉकेट प्रणाली का हुआ अनावरण

शिरडी (महाराष्ट्र), 24 मई, 2026। भारतीय रक्षा विनिर्माण के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिरडी में ‘एनआईबीई (NIBE) ग्रुप’ के अत्याधुनिक निजी रक्षा विनिर्माण परिसर का उद्घाटन किया। शनिवार, 23 मई को आयोजित इस कार्यक्रम में देश की सैन्य आत्मनिर्भरता को धार देते हुए भारत की पहली 300 किलोमीटर दूरी तक मार करने वाली सार्वभौमिक रॉकेट प्रक्षेपण प्रणाली ‘सूर्यस्त्र’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भविष्य के युद्ध सेनाओं के आकार से नहीं, बल्कि देश की तकनीकी और गोला-बारूद क्षमता से तय होंगे। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट का हवाला देते हुए कहा कि भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के माध्यम से पहले ही अपनी इस ताकत का परिचय दे दिया है।

पुर्जों के सप्लायर से हथियार निर्माता बना निजी क्षेत्र

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि जो रक्षा क्षेत्र कभी सिर्फ सरकारी उपक्रमों (PSUs) तक सीमित था, आज वह निजी उद्योगों के लिए खोल दिया गया है। उन्होंने कहा:

“एक दौर था जब रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र का योगदान न के बराबर था, जो आज बढ़कर करीब 25-30 प्रतिशत हो चुका है। हमारा आगामी लक्ष्य इसे 50 प्रतिशत तक ले जाना है। अब देश का निजी उद्योग केवल छोटे-मोटे पुर्जे नहीं बना रहा, बल्कि आधुनिक हथियार प्रणालियों का आविष्कारक बनकर उभरा है।”


मुख्य बिंदु:

  • नया मंत्र: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा—”स्वयं हथियार बनाने वाले राष्ट्र ही अपने कल का निर्माण करते हैं।”
  • बड़ी उपलब्धि: देश की पहली 300 किमी रेंज वाली ‘सूर्यस्त्र’ यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चिंग प्रणाली को दिखाई गई हरी झंडी।
  • बदलता भारत: रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को 25-30% से बढ़ाकर 50% करने का लक्ष्य।
  • रणनीतिक संदेश: यूक्रेन संकट और पश्चिम एशिया के हालातों के बीच गोला-बारूद और ऑटोमेशन में आत्मनिर्भरता अनिवार्य।
  • निजी क्षेत्र के साथ वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की राह पर भारत

इस नए परिसर में एडवांस्ड आर्टिलरी सिस्टम, मिसाइल व स्पेस टेक्नोलॉजी, रॉकेट सिस्टम और स्वायत्त (Autonomous) रक्षा प्लेटफॉर्म विकसित किए जाएंगे। समारोह के दौरान स्वदेशी टीएनटी और आरडीएक्स संयंत्र तकनीकों के साथ-साथ उपग्रह संयोजन (Satellite Assembly) के लिए एनआईबीई समूह और ‘ब्लैक स्काई’ के बीच एक एमओयू (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए।

सुरक्षा और अर्थव्यवस्था एक ही सिक्के के दो पहलू

रक्षा मंत्री ने वैश्विक हालातों पर चिंता जताते हुए कहा कि आज व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chains) और दुर्लभ खनिजों का शस्त्रीकरण (Weaponization) किया जा रहा है। ऐसे में भारत अपनी रक्षा ज़रूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रह सकता। आत्मनिर्भरता केवल युद्ध की तैयारी नहीं, बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता और शांति के लिए भी ज़रूरी है।

रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

यह रक्षा परिसर न केवल सेना को मजबूत करेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए एक बड़ा इकोसिस्टम तैयार करेगा। गोला-बारूद और रॉकेट प्रणालियों के निर्माण से सहायक उद्योगों में हज़ारों युवाओं के लिए उच्च-तकनीकी रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्र सरकार की ‘मेक-इन-इंडिया’ पहल की सराहना करते हुए कहा कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की यह जुगलबंदी राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारतीय सैनिकों के शौर्य और स्वदेशी ताकत का बेजोड़ उदाहरण बताया।

इस भव्य समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान, डीआरडीओ (DRDO) के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार और महाराष्ट्र सरकार के कई कैबिनेट मंत्रियों सहित सेना और उद्योग जगत की दिग्गज हस्तियां मौजूद थीं।