उत्तराखंड के सभी प्राथमिक स्कूलों में बनेंगे बालिका शौचालय, 141 विद्यालयों के लिए 5.34 करोड़ स्वीकृत

देहरादून। प्रदेश के सभी प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जिन विद्यालयों में अब तक बालिका शौचालय नहीं हैं, वहां जल्द ही निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 141 विद्यालयों में शौचालय निर्माण हेतु 5 करोड़ 34 लाख रुपये की धनराशि जारी कर दी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मार्च माह के भीतर निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए।

विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कल मंगलवार, 10 मार्च को मीडिया को जारी बयान में कहा कि सरकार स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यालयों में फर्नीचर, पेयजल और शौचालय जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के साथ उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बेटियों के लिए सुरक्षित शौचालय की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है, इसलिए इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

मंत्री ने बताया कि प्रदेश के 11 जनपदों के 141 राजकीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अभी बालिका शौचालय नहीं हैं। इन सभी स्कूलों में जल्द निर्माण कराया जाएगा। जनपदवार देखें तो रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में 7-7, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर में 6-6, नैनीताल में 25, देहरादून में 16, उत्तरकाशी में 10, चम्पावत में 5, अल्मोड़ा में 4, पौड़ी में 2 और टिहरी में सर्वाधिक 53 विद्यालयों में शौचालय बनाए जाएंगे।

इसके लिए कुल 5 करोड़ 34 लाख 39 हजार रुपये की धनराशि जारी की गई है। रुद्रप्रयाग और बागेश्वर को 26.53-26.53 लाख, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर को 22.74-22.74 लाख, नैनीताल को 94.75 लाख, देहरादून को 60.64 लाख, उत्तरकाशी को 37.90 लाख, चम्पावत को 18.95 लाख, अल्मोड़ा को 15.16 लाख, पौड़ी को 7.58 लाख और टिहरी जिले को 2 करोड़ 87 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

डॉ. रावत ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा किया जाए और इसकी प्रगति रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) को जिम्मेदार माना जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि यू-डायस के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के सरकारी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में कुल 1640 बालक-बालिका शौचालय वर्तमान में निष्क्रिय हैं। इनमें से 1560 प्राथमिक विद्यालयों और 80 माध्यमिक विद्यालयों में हैं। सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि 31 मार्च तक इन सभी शौचालयों को मरम्मत कर पुनः चालू किया जाए, ताकि छात्र-छात्राओं को उनका लाभ मिल सके।