शिक्षा में आध्यात्मिक मूल्यों को संजोने में ब्रह्माकुमारी संस्था की अनुकरणीय भूमिका : डॉ. घिल्डियाल
ऋषिकेश। भारतीय संस्कृति और परंपरा की सुरक्षा के लिए शिक्षा में आध्यात्मिकता का समावेश अत्यंत आवश्यक है। इस दिशा में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय निरंतर एक सराहनीय भूमिका निभा रहा है।
यह उद्गार संस्कृत शिक्षा के सहायक निदेशक डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने व्यक्त किए। वह संस्थान द्वारा “मूल्यनिष्ठ समाज के निर्माण में शिक्षक का योगदान” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वास्तविक शिक्षा वही है जो मनुष्य को संकीर्णताओं और बंधनों से मुक्त करे, और यह ध्येय शिक्षा के आध्यात्मिक पहलू को बनाए रखकर ही हासिल किया जा सकता है।

शिक्षक दिवस के अवसर पर सेवानिवृत्त उच्च शिक्षा निदेशक समेत विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले प्राचार्यों और अध्यापकों को सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. घिल्डियाल ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र का शिल्पकार है, किंतु उसे हमेशा अपने कर्तव्यबोध और आत्म-सम्मान के प्रति जागरूक रहते हुए दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय (हरिद्वार) के योग विभागाध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीनारायण जोशी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि शिक्षा की सफलता बड़े वेतन पैकेज में नहीं, बल्कि जीवन में उच्च आदर्शों की स्थापना में निहित है।
इससे पूर्व, मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए केंद्र की संचालिका बीके आरती ने उन्हें अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और पुष्पगुच्छ भेंट किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्राणी में ईश्वर का अंश विद्यमान है और इसी की अनुभूति करना ही सच्ची शिक्षा है। प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति से समाज और शिक्षकों का मनोबल बढ़ता है।
बीके प्रकाश के सफल संचालन में संपन्न हुए इस समारोह में मोहन रणकोटी, राजेंद्र प्रसाद पांडे सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद, समाजसेवी तथा बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।

