जीएसटी ‘अंडरकवर’ ऑपरेशन: फर्जी कंपनियां बनाकर पकड़ी 150 करोड़ की टैक्स चोरी
देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड जीएसटी विभाग के विशेष जांच ब्यूरो (SIB) ने कर चोरी पकड़ने के लिए एक बेहद अनोखा और साहसी तरीका अपनाया है। विभाग के अधिकारियों ने खुद की फर्जी फर्में बनाईं और एक संदिग्ध कंपनी का विश्वास जीतकर 150 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का खुलासा किया।
महीनों चला ‘सीक्रेट’ मिशन
कुमाऊं क्षेत्र के संयुक्त आयुक्त रोशन लाल के अनुसार, सितारगंज स्थित एक ट्रांसफार्मर निर्माता कंपनी के खिलाफ कर चोरी की खुफिया सूचना मिली थी। यह कंपनी अपनी बिक्री छिपाने के लिए एक ऐसी पुरानी फर्म के नाम का इस्तेमाल कर रही थी, जिसे कागजों में बहुत पहले बंद किया जा चुका था।
दोषियों को रंगे हाथों पकड़ने के लिए विभाग ने एक मास्टरप्लान तैयार किया:
- दो जीएसटी अधिकारियों ने व्यापारी बनकर नई फर्में रजिस्टर कीं।
- कई महीनों तक संदिग्ध कंपनी के साथ व्यापारिक बातचीत की गई ताकि उनका भरोसा जीता जा सके।
- विभाग के कुछ कर्मचारी खरीदार बनकर कंपनी में गए और उनके अवैध लेनदेन के सबूत जुटाए।
छापेमारी और रिकवरी
18 मार्च 2026 को पुख्ता सबूत मिलने के बाद टीम ने फैक्ट्री पर धावा बोला। लगभग 8 घंटे तक चले इस तलाशी अभियान में डिजिटल और कागजी दस्तावेजों को जब्त किया गया।
- छापेमारी के दौरान ही कंपनी से 19.83 करोड़ रुपये का जीएसटी मौके पर जमा करवाया गया।
- इस पूरे नेटवर्क को क्रैक करने के लिए विभाग ने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और फॉरेंसिक टूल्स की मदद ली है।
अधिकारियों ने फिलहाल संबंधित बैंक खातों और जीएसटी क्रेडिट को फ्रीज कर दिया है। विभाग को अंदेशा है कि इस रैकेट के तार अन्य राज्यों और कंपनियों से भी जुड़े हो सकते हैं, जिसकी जांच अभी जारी है।
यह ऑपरेशन विभाग की कार्यशैली में आए आधुनिक बदलाव और डेटा एनालिटिक्स के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

