‘भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड और संस्कृत को राजभाषा बनाने वाले युगपुरुष थे खंडूरी जी’ — डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ‘दैवज्ञ’

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूरी के निधन पर देश और प्रदेश में शोक की लहर है। इसी क्रम में उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ‘दैवज्ञ’ ने पूर्व मुख्यमंत्री के अवसान पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए अपनी शोक संवेदनाएं प्रकट की हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री को याद करते हुए डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने पुराने दिनों के संस्मरण साझा किए। उन्होंने बताया कि साल 1990 में जब पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रेरणा से जनरल खंडूरी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ने आए थे, तब वह खुद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के छात्र नेता के रूप में उनकी चुनावी सभाओं का संचालन किया करते थे। खंडूरी जी उनके इस कार्य और शैली से काफी प्रभावित रहते थे।

डॉ. घिल्डियाल ने आगे कहा कि जनरल खंडूरी सिर्फ एक अनुशासित सैन्य अधिकारी और कुशल राजनेता ही नहीं, बल्कि एक बेहद ईमानदार जनसेवक भी थे। पृथक उत्तराखंड राज्य के निर्माण के लिए लोकसभा में उनके द्वारा की गई मजबूत पैरवी और मुख्यमंत्री रहते हुए राज्य में भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासनिक व्यवस्था लागू करने के उनके ऐतिहासिक प्रयासों के लिए उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने संस्कृत भाषा के उत्थान में जनरल खंडूरी के योगदान को अभूतपूर्व बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 से 2009 के अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान खंडूरी जी ने संस्कृत के 13 विद्यालयों को सरकारी अनुदान की श्रेणी में शामिल किया। इसके अलावा, संस्कृत विद्यालय भर्ती नियमावली 2007 और 2009 की अधिसूचना जारी करवाकर उन्होंने साल 1992 से रुकी हुई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को दोबारा शुरू करवाया। उत्तराखंड में संस्कृत के विकास के लिए उसे शिक्षा विभाग से अलग कर एक स्वतंत्र विभाग का दर्जा देने और संस्कृत को राज्य की द्वितीय राजभाषा घोषित करने का ऐतिहासिक श्रेय भी पूरी तरह जनरल खंडूरी को ही जाता है।