साहित्य ही मानवीय मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त सेतु: डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल
देहरादून। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, उत्तराखंड द्वारा हिंदी भवन में आयोजित ‘साहित्य चर्चा’ के दौरान शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा के सहायक निदेशक डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने साहित्य की महत्ता पर प्रकाश डाला। वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं को जीवित रखने व उन्हें नई पीढ़ी में संचारित करने के लिए साहित्य से बेहतर कोई माध्यम नहीं है।
सामाजिक क्रांति का अग्रदूत है साहित्य
डॉ. घिल्डियाल ने अपने संबोधन में कहा कि आदिकाल से लेकर वर्तमान तक साहित्यकारों ने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को नई दिशा दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
- साहित्य चाहे हिंदी, अंग्रेजी या संस्कृत का हो, उसका मूल उद्देश्य समाज में व्याप्त कुरीतियों पर प्रहार करना है।
- स्वतंत्रता संग्राम से लेकर सती प्रथा के उन्मूलन और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर साहित्य ने हमेशा वैचारिक क्रांति का नेतृत्व किया है।
- वर्तमान पीढ़ी को अपनी जड़ों और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के लिए साहित्य एक अनिवार्य माध्यम है।
भव्य रहा कार्यक्रम का आयोजन
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि राजेंद्र जी (प्रांत प्रमुख, सामाजिक समरसता, RSS), डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल, सौरभ पांडे और मुख्य वक्ता डॉ. जगदीश चंद्र पंत ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

- अध्यक्षता: डॉ. सुमन तिवारी (जिला अध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद)।
- संचालन: विख्यात साहित्यकार एवं वाइस प्रिंसिपल क्षमा कौशिक।
- स्वागत सत्कार: कार्यक्रम संयोजक डॉ. ज्योति श्रीवास्तव ने अतिथियों को अंग वस्त्र पहनाकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर साहित्य जगत और प्रबुद्ध वर्ग की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें प्रांतीय सह मंत्री अंजू श्रीवास्तव, कैप्टन अनिल काला, डॉ. वंदना खंडूरी, और डीएवी कॉलेज की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पा खंडूरी मुख्य थे। उपस्थित बुद्धिजीवियों ने एक स्वर में साहित्य के माध्यम से सामाजिक उत्थान के संकल्प को दोहराया।

