कुमाऊंनी लोक संगीत के एक युग का अंत: नहीं रहे सुप्रसिद्ध गायक दीवान कनवाल, संगीत जगत में शोक की लहर

अमर उजियारा | विशेष शोक समाचार

हल्द्वानी/अल्मोड़ा, 11 मार्च 2026। उत्तराखंड के लोक संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है। कुमाऊंनी लोक गीतों को अपनी सुरीली आवाज से घर-घर पहुँचाने वाले दिग्गज गायक दीवान कनवाल अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे प्रदेश और विशेषकर कुमाऊँ मंडल के कलाकारों और संगीत प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है।

पहाड़ की संस्कृति के सच्चे संवाहक

दीवान कनवाल केवल एक गायक नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के सच्चे संवाहक थे। उन्होंने दशकों तक अपनी गायकी के माध्यम से पहाड़ की पीड़ा, प्रेम और परंपराओं को स्वर दिया। उनकी आवाज में वो ठेठ पहाड़ीपन था, जो सीधे सुनने वाले के दिल को छू जाता था।

लोकप्रिय गीतों की विरासत

दीवान कनवाल के कई गीत आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं। विशेष रूप से कल्पना चौहान के साथ गाया गया उनका प्रसिद्ध गीत “आज कुचे मैत जा” (Aaj Kuche Mait Jaa) आज भी हर मांगलिक अवसर और पहाड़ की महफिलों की शान बना रहता है। उनके अन्य गीतों ने भी क्षेत्रीय संगीत को एक नई ऊँचाई दी।

कलाकारों ने दी श्रद्धांजलि

उनके निधन पर उत्तराखंड के वरिष्ठ कलाकारों, गायकों और सांस्कृतिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसकों ने उन्हें याद करते हुए इसे ‘लोक संगीत के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत’ बताया है। कलाकारों का कहना है कि दीवान दा की जगह को भरना नामुमकिन है, लेकिन उनके गीत हमेशा नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

अमर उजियारा परिवार लोक गायक दीवान कनवाल जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है और ईश्वर से प्रार्थना करता है कि उनके परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करे।