प्रदेश में सहकारिता को मिलेगा नया विस्तार, तीन नए जिला सहकारी बैंक खोलने की तैयारी : डॉ. धन सिंह रावत
- 55 नई शाखाओं के खुलने से दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचेगी बैंकिंग सुविधा
- एनपीए वसूली के लिए 15 दिन का विशेष अभियान, लक्ष्य पूरा न करने पर होगी कार्रवाई
देहरादून, 5 मार्च 2026। प्रदेश में सहकारिता तंत्र को मजबूत और प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है। राज्य में तीन नए जिला सहकारी बैंक स्थापित किए जाएंगे, वहीं सहकारी बैंकों की 55 नई शाखाएं भी खोली जाएंगी। इन शाखाओं के खुलने से दूर-दराज के क्षेत्रों में भी लोगों को बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी और सहकारिता आंदोलन को नई गति मिलेगी।
सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने गुरुवार को अपने शासकीय आवास से राज्य सहकारी बैंक और जिला सहकारी बैंकों की वर्चुअल समीक्षा बैठक ली। बैठक में राज्य सहकारी बैंक और सभी जिला सहकारी बैंकों के महाप्रबंधक उपस्थित रहे, जबकि विभिन्न जनपदों के सहायक निबंधक वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

बैठक के दौरान मंत्री डॉ. रावत ने बैंकों में बढ़ते एनपीए को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिला सहकारी बैंकों के महाप्रबंधकों को निर्देश दिए कि अगले 15 दिनों के भीतर विशेष वसूली अभियान चलाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि तय लक्ष्य हासिल न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि एनपीए वसूली में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि किसी जनपद में वसूली अभियान में ढिलाई पाई जाती है तो संबंधित सहायक निबंधक और बैंक महाप्रबंधक की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
डॉ. रावत ने बताया कि मार्च महीने में वे स्वयं हर पांच दिन के अंतराल पर 30 मार्च तक समीक्षा बैठक करेंगे और एनपीए वसूली की प्रगति की जानकारी लेंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि 30 मार्च के बाद जिन जिलों में वसूली की प्रगति संतोषजनक नहीं मिलेगी, वहां जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक में सहकारिता मंत्री ने निबंधक सहकारिता को निर्देश दिए कि 1 अप्रैल से प्रदेश की शीर्ष सहकारी समितियों में बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य की जाए, जिससे कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित हो सके।
इसके अलावा जनपदों के प्रभारी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सहकारी समितियों की बैठक आयोजित करने और जमीनी स्तर पर निरीक्षण एवं भ्रमण करने के निर्देश भी दिए गए। मंत्री ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की जाएगी, ताकि सहकारिता व्यवस्था को और अधिक प्रभावी व जवाबदेह बनाया जा सके।
वर्चुअल बैठक में निबंधक सहकारी समितियां डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, अपर निबंधक श्रीमती ईरा उप्रेती, राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक प्रदीप मेहरोत्रा सहित विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
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