पिथौरागढ़: सेना और थिंक टैंक ‘भीष्म’ ने रणनीतिक विमर्श संगोष्ठी का किया आयोजन
देहरादून/पिथौरागढ़, 22 मई 2026। ‘हर काम देश के नाम’ के मूल मंत्र के साथ, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में भारतीय सेना की मध्य कमान और देहरादून स्थित प्रतिष्ठित थिंक टैंक ‘भीष्म’ (BHISM) के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस सेमिनार का मुख्य विषय “भारत के पड़ोस में रणनीतिक संस्कृति: निरंतरता, विरोधाभास और समकालीन निहितार्थ” रखा गया था। कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य पड़ोसी देशों की बदलती रणनीतिक सोच और क्षेत्रीय स्थिरता व भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले उसके प्रभावों का गहन विश्लेषण करना था।

बौद्धिक और रणनीतिक जागरूकता पर जोर
यह संगोष्ठी भारतीय सेना द्वारा संचालित पेशेवर सैन्य शिक्षा (PME) पहल की एक कड़ी है। इसका उद्देश्य मध्य कमान के सैन्य अधिकारियों, अल्मोड़ा के सोबन सिंह जीना (एसएसजे) विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और एनसीसी कैडेट्स के भीतर रणनीतिक समझ, विश्लेषणात्मक क्षमता और बौद्धिक कौशल को निखारना है। यह मंच सुरक्षा परिदृश्य को प्रभावित करने वाले ऐतिहासिक घटनाक्रमों, सैद्धांतिक दृष्टिकोणों और आधुनिक बदलावों को समझने का एक बेहतरीन जरिया बना।
प्रमुख चर्चाएं और सुरक्षा चुनौतियां

सेमीनार में शीर्ष सैन्य नेतृत्व, विषय विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। संगोष्ठी में मुख्य रूप से इस बात पर मंथन हुआ कि किस तरह ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक विचार, राजनैतिक व्यवहार और शासन कला समकालीन वैश्विक नीतियों को आकार दे रहे हैं। इसके साथ ही वर्तमान दौर की प्रमुख चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं:
- सीमा प्रबंधन और सैन्य रणनीतियाँ
- ग्रे ज़ोन (Grey Zone) चुनौतियाँ और सूचना तंत्र का प्रभाव
- अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) विकास और क्षेत्रीय वर्चस्व की होड़
विशेषज्ञों ने इस बात को रेखांकित किया कि उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए भारत को एक बेहद जागरूक, सुविचारित और आक्रामक रुख अपनाने की जरूरत है।
पंचशूल ब्रिगेड और SSJ विश्वविद्यालय के बीच ऐतिहासिक समझौता
इस कार्यक्रम की एक बड़ी उपलब्धि पंचशूल ब्रिगेड और अल्मोड़ा के सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होना रहा। यह अनुबंध दोनों संस्थाओं के बीच शैक्षणिक तालमेल, ज्ञान साझा करने और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देगा, जिससे इस पूरे क्षेत्र के बौद्धिक और नीतिगत विकास को एक नई दिशा मिलेगी।
संगोष्ठी के अंत में वक्ताओं ने दोहराया कि बेहद जटिल होते जा रहे सुरक्षा माहौल का सामना करने के लिए ऐसी वैचारिक और दूरदर्शी पहलें देश की तैयारियों को और अधिक मजबूती प्रदान करती हैं।

