रानीपोखरी नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी पर रार: ग्रामीणों का हल्ला बोल, सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

देहरादून/रानीपोखरी। राजधानी देहरादून के रानीपोखरी क्षेत्र में प्रस्तावित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) का मामला एक बार फिर गरमा गया है। डोईवाला विधानसभा के अंतर्गत आने वाले रानीपोखरी, भट्टनगरी और लिस्ट्राबाद के ग्रामीणों ने सरकार पर वादाखिलाफी और धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए आंदोलन तेज कर दिया है।

ग्रामीणों का आरोप: “शिक्षा के नाम पर ली जमीन, अब कर रहे कब्जा”

स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने यह बेशकीमती जमीन क्षेत्र में एक बड़े शिक्षण संस्थान (लॉ यूनिवर्सिटी) की स्थापना के लिए दी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि 7 साल बीत जाने के बाद भी यूनिवर्सिटी के नाम पर वहां एक ईंट तक नहीं रखी गई। अब उन्हें अंदेशा है कि सरकार इस भूमि को खुर्द-बुर्द कर टिहरी बांध विस्थापितों या अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने की योजना बना रही है।

कांग्रेस ने दिया समर्थन, पुलिसिया कार्रवाई पर उठाए सवाल

इस आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। कांग्रेस के कई दिग्गज नेता धरना स्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों की मांगों का समर्थन कर रहे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रशासन पुलिस बल के दम पर ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं को डराने-धमकाने का प्रयास कर रहा है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर हुए लाठीचार्ज और अभद्रता को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार की कड़ी निंदा की है।

मुख्यमंत्री धामी का रुख: “विकास हमारी प्राथमिकता”

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे कोई भी अस्थायी या कमजोर व्यवस्था नहीं बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि पूरा मामला उनके संज्ञान में है और भाजपा सरकार द्वारा लिए गए इस प्रोजेक्ट पर जल्द ही उचित निर्णय लिया जाएगा।

शिलान्यास के 7 साल बाद भी सन्नाटा

उल्लेखनीय है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में इस यूनिवर्सिटी का शिलान्यास किया गया था। उस समय स्थानीय सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक और शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत भी मौजूद थे। लेकिन लंबे समय से काम लटका होने के कारण अब जनता का भरोसा डगमगाने लगा है।