“राम नवमी” प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारने का दिन है: उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ”

देहरादून/हरिद्वार (संस्कृति डेस्क, अमर उजियारा)। आचार्य चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ” बताते हैं कि समग्र भारतवर्ष में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम नवमी का त्योहार बड़े ही उल्लास और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह दिन भगवान श्री राम के जन्मोत्सव का प्रतीक है, जिन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में जाना जाता है। राम नवमी न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह राम के आदर्शों को याद करने और उन्हें अपने जीवन में उतारने का भी एक अवसर है।

भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, जिसका अर्थ है – “मर्यादाओं में सबसे उत्तम पुरुष”। राम ने अपने जीवन में हर रिश्ते और कर्तव्य को पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाया। वे एक आदर्श पुत्र, भाई, पति और राजा थे। उनके जीवन से हमें सत्य, धर्म, त्याग, संयम और न्याय जैसे मूल्यों की सीख मिलती है।

सत्य और धर्म: पर चलने की सीख

राम ने हमेशा सत्य का साथ दिया और धर्म के पथ पर चले। उन्होंने अपने पिता के वचनों को निभाने के लिए राजपाट त्याग दिया और वनवास चले गए। उन्होंने कभी भी असत्य या अधर्म का सहारा नहीं लिया, भले ही इसके लिए उन्हें कितनी ही कठिनाइयों का सामना क्यों न करना पड़ा हो।

त्याग और संयम बरतने को सीख:

राम ने अपने जीवन में अपार त्याग किया। उन्होंने अपने सुखों को त्याग कर अपने माता-पिता और प्रजा की सेवा की। उन्होंने अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखा और संयमित जीवन जिया।

हमेशा न्याय का पक्ष लेने को सीख:

राम ने हमेशा न्याय का पक्ष लिया। उन्होंने अपनी प्रजा के साथ समान व्यवहार किया और सभी को न्याय दिलाया। उन्होंने रावण जैसे अत्याचारी राजा का अंत कर धर्म की स्थापना की।

राम के आदर्शों को अपनाने का अवसर है राम नवमी

आचार्य “दैवज्ञ” के अनुसार राम नवमी केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह राम के आदर्शों को अपनाने और एक बेहतर इंसान बनने का एक अवसर है। इस दिन हमें राम के जीवन से सीख लेनी चाहिए और उनके पदचिन्हों पर चलने का प्रयास करना चाहिए।

जीवन में प्रभु श्रीराम के आदर्शों को कैसे उतारें?

आचार्य चंडी प्रसाद घिल्डियाल आगे बताते हैं कि हमें सत्य और धर्म का पालन करना चाहिए। हमें हमेशा सच बोलना चाहिए और सही रास्ते पर चलना चाहिए, भले ही यह मुश्किल ही क्यों न हो।

  • हमें अपने सुखों को त्यागने और दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहना चाहिए। हमें अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए और संयमित जीवन जीना चाहिए।
  • हमें हमेशा न्याय का साथ देना चाहिए और सभी के साथ समान व्यवहार करना चाहिए।
  • हमें राम के आदर्शों को अपने परिवार, समाज और राष्ट्र में बढ़ावा देना चाहिए।

राम नवमी एक महान त्योहार है जो हमें राम के आदर्शों को याद दिलाता है और हमें एक बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करता है। इस अवसर पर, आइए हम सब मिलकर प्रतिज्ञा करें कि हम राम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारेंगे और एक समृद्ध और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण करेंगे।

शुभ राम नवमी!