उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों के लिए बड़ी खबर: पंचायतों में अब लगेगा हाउस टैक्स, कूड़ा उठाने के लिए भी देना होगा यूजर चार्ज

देहरादून। उत्तराखंड सरकार प्रदेश की पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य मंत्रिमंडल ने पंचायतों के लिए नई नियमावली को मंजूरी देने की तैयारी कर ली है, जिसके तहत अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी भवन कर (House Tax) और कूड़ा निस्तारण के लिए यूजर चार्ज लागू किया जाएगा।

पंचायतों की बढ़ेगी आमदनी

अब तक पंचायतों के पास विकास कार्यों के लिए मुख्य रूप से राज्य और केंद्र सरकार से मिलने वाले बजट पर निर्भर रहना पड़ता था। नई नियमावली लागू होने के बाद ग्राम पंचायतें स्वयं राजस्व जुटा सकेंगी। इस राशि का उपयोग गांव की गलियों, नालियों की मरम्मत और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं के बेहतर रखरखाव के लिए किया जाएगा।

कूड़ा निस्तारण के लिए देना होगा शुल्क

स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में भी अब शहरों की तर्ज पर कूड़ा प्रबंधन किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक परिवार और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से यूजर चार्ज वसूला जाएगा। इससे न केवल गांवों में स्वच्छता बनी रहेगी, बल्कि पंचायतों के पास सफाई कर्मियों के वेतन और कचरा प्रबंधन के लिए अपना फंड भी उपलब्ध होगा।

किसे देना होगा टैक्स?

सूत्रों के अनुसार, शुरुआती चरण में यह टैक्स उन मकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लगाया जा सकता है जो पक्के निर्माण के दायरे में आते हैं। सरकार टैक्स की दरों को न्यूनतम रखने पर विचार कर रही है ताकि ग्रामीण आबादी पर अत्यधिक बोझ न पड़े। बीपीएल (BPL) परिवारों को इस टैक्स से छूट या विशेष राहत दी जा सकती है।

आत्मनिर्भर बनेंगे गांव

पंचायती राज विभाग का मानना है कि इस कदम से पंचायतों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी और वे अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र होंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई मौकों पर ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ के संकल्प को दोहराया है, और यह कदम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

ब्यूरो रिपोर्ट: अमर उजियारा