सावधान! 2 अप्रैल से मीन राशि में बन रहा ‘द्वंद्व योग’, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध और अशांति की आशंका: आचार्य दैवज्ञ

देहरादून/हरिद्वार। आने वाली 2 अप्रैल 2026 से सौरमंडल में ग्रहों की बड़ी हलचल होने जा रही है, जिसका गहरा प्रभाव पूरी दुनिया पर देखने को मिल सकता है। प्रख्यात ज्योतिषाचार्य और ‘उत्तराखंड ज्योतिष रत्न’ आचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ” के विश्लेषण के अनुसार, नवग्रहों के सेनापति ‘मंगल’ देवगुरु बृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश करेंगे। यहाँ न्याय के देवता शनिदेव पहले से ही विराजमान हैं, जिससे ‘द्वंद्व योग’ का निर्माण होगा।

तीसरे विश्व युद्ध जैसी बन सकती है भूमिका

​आचार्य दैवज्ञ ने चेतावनी देते हुए बताया कि वर्तमान में मंगल कुंभ राशि में हैं, लेकिन 2 अप्रैल को मीन में जाते ही शनि के साथ उनका टकराव शुरू हो जाएगा। मंगल और शनि परस्पर शत्रु ग्रह माने जाते हैं। इस युति के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रोध, ईर्ष्या और वैमनस्य बढ़ेगा, जिससे देशों के बीच आक्रामकता बढ़ सकती है। आचार्य का मानना है कि यह स्थिति तृतीय विश्व युद्ध जैसी भूमिका तैयार कर सकती है।

इन देशों के बीच बढ़ सकता है तनाव

​ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार:

  • परमाणु शक्तियां: अमेरिका, रूस और चीन जैसी महाशक्तियों के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव गहरा सकता है।
  • पड़ोसी देश: भारत-पाकिस्तान और इजरायल-ईरान जैसे पारंपरिक शत्रुओं के बीच सीमाओं पर अशांति की आशंका है।
  • समय सीमा: यह प्रभाव मुख्य रूप से 2 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 तक विशेष रूप से घातक रहेगा, हालांकि ग्रहों की यह स्थिति 11 मई तक बनी रहेगी।

राशियों पर प्रभाव और बचाव के उपाय

​आचार्य ने बताया कि इस योग का असर आम जनमानस की राशियों पर भी पड़ेगा:

  • सतर्क रहें: मेष, कन्या और मीन राशि के जातकों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
  • लाभ की स्थिति: मिथुन, सिंह और कुंभ राशि के लोगों के लिए यह समय लाभदायक सिद्ध हो सकता है।

आचार्य दैवज्ञ का संदेश:

​”ज्योतिष शास्त्र का उद्देश्य भय फैलाना नहीं, बल्कि आने वाले संकट के प्रति मार्गदर्शन करना है। अशांति के इस कालखंड में लोग अपनी वाणी और क्रोध पर नियंत्रण रखें और शांति हेतु ईश्वर की आराधना व पूजा-पाठ पर ध्यान दें।”