हर जिले में बनेंगे मॉडल सहकारिता गांव, सचिवों को गुजरात भेजने की तैयारी
देहरादून। प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को नई गति देने के लिए हर जनपद में एक-एक मॉडल सहकारिता गांव स्थापित किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी योजना को जल्द जमीन पर उतारने के लिए विभागीय अधिकारियों को विस्तृत रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कल 28 फरवरी को अपने शासकीय आवास पर आयोजित बैठक में अधिकारियों को संस्कृत गांव की तर्ज पर मॉडल सहकारिता गांव विकसित करने को कहा। उन्होंने बताया कि इन गांवों में सहकारी बैंक, सीएससी सेंटर और सहकारी बाजार स्थापित किए जाएंगे। सहकारी बाजार महिला स्वयं सहायता समूहों, किसान समूहों और ग्रामीण उत्पादकों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए मजबूत मंच देगा। योजना का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और सहकारिता आधारित आत्मनिर्भर मॉडल विकसित करना है।
बैठक में मंत्री ने सहकारी समितियों के 50 सचिवों को अध्ययन भ्रमण के लिए गुजरात भेजने के निर्देश भी दिए। इस दौरे में नई और शुरुआती दौर की समितियों के सचिवों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि वे सफल मॉडलों से सीख लेकर अपनी समितियों को मजबूत बना सकें।
उन्होंने कहा कि होली के बाद संयुक्त और अपर निबंधक अपने-अपने जिलों में ब्लॉक स्तर पर समीक्षा बैठकें करेंगे। घाटे में चल रही समितियों को उबारने के लिए जमीनी स्तर पर रणनीति बनाकर ठोस कार्ययोजना लागू की जाएगी।
मंत्री ने सभी पैक्स और एपेक्स समितियों की नियमित बोर्ड बैठकें अनिवार्य करने के साथ ही सहकारी समितियों और बैंकों में नियुक्तियां आईबीपीएस के माध्यम से पारदर्शी तरीके से करने के निर्देश दिए। साथ ही 15 मार्च तक भर्ती विज्ञापन जारी करने को कहा गया। उन्होंने सहकारिता मंत्रालय की तर्ज पर प्रदेश में सोशल मीडिया के जरिए योजनाओं और उपलब्धियों का प्रचार स्थानीय बोली-भाषा में करने पर भी जोर दिया।
डॉ. रावत ने विश्वास जताया कि मॉडल सहकारिता गांव आने वाले समय में प्रदेश में सहकारिता आधारित, आत्मनिर्भर और समावेशी विकास की नई मिसाल बनेंगे। बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

