मंत्र-यंत्र सिद्धि के लिए 15 फरवरी से 30 जून तक का काल अत्यंत शुभ: आचार्य दैवज्ञ
देहरादून। सौरमंडल में ग्रहों की वर्तमान और आगामी स्थितियों के अनुसार 15 फरवरी से 30 जून 2026 तक का समय मंत्रों और यंत्रों की सिद्धि के लिए अत्यंत शुभ और फलदायक रहने वाला है। इस अवधि में महाशिवरात्रि, सूर्य ग्रहण, होली, नवरात्रि, बैसाखी, अक्षय तृतीया जैसे कई महत्वपूर्ण धार्मिक और ज्योतिषीय संयोग बन रहे हैं, जो साधना और सिद्धि के लिए विशेष रूप से लाभकारी माने जाते हैं।
उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ‘दैवज्ञ’ के अनुसार वर्ष 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी, मंगलवार को फाल्गुन अमावस्या के दिन लगने जा रहा है। यह कंकण सूर्य ग्रहण होगा, जिसका सूतक काल ग्रहण से लगभग 12 घंटे पूर्व आरंभ हो जाएगा। ग्रहण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर शुरू होकर शाम 7 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगा।
ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य ग्रहण राहु और केतु के कारण माना जाता है, जबकि वैज्ञानिक रूप से यह तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य को आंशिक रूप से ढक लेता है।
हाल ही में राज्यपाल द्वारा ‘ज्योतिष श्री चक्र सम्मान’ से सम्मानित आचार्य दैवज्ञ बताते हैं कि यह सूर्य ग्रहण कुंभ राशि में घटित होगा, जहां सूर्य और राहु दोनों का गोचर रहेगा। ऐसे में यह ग्रहण वैश्विक स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है, हालांकि भारत में यह प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगा। इसके बावजूद, मंत्र-यंत्र सिद्धि और साधना के लिए यह काल भारत में भी अत्यंत प्रभावशाली माना जा रहा है।
आचार्य दैवज्ञ के अनुसार महाशिवरात्रि (15 फरवरी) और सूर्य ग्रहण (17 फरवरी) का संयोग विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। इसके बाद 19 मार्च को सौरमंडल के वार्षिक परिवर्तन का काल, 24 मार्च तक बासंतीय नवरात्रि, 14 अप्रैल को बैसाखी, अक्षय तृतीया तथा वट सावित्री व्रत जैसे पर्व आएंगे। ये सभी तिथियां साधना, यंत्र सिद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती हैं।

